
कक्षा 12 जीव विज्ञान अध्याय 1: जीवों में जनन (Reproduction in Organisms)
UP Board परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण प्रश्न
बहुविकल्पीय प्रश्न (10 MCQs):-
- निम्नलिखित में से कौन-सा अलैंगिक जनन का उदाहरण नहीं है?
(अ) मुकुलन
(ब) खंडन
(स) युग्मक संलयन
(द) बीजाणु निर्माण
उत्तर: (स) युग्मक संलयन
- हाइड्रा में जनन किस विधि द्वारा होता है?
(अ) द्विखंडन
(ब) मुकुलन
(स) बीजाणु निर्माण
(द) खंडन
उत्तर: (ब) मुकुलन - आलू में कायिक प्रवर्धन किसके द्वारा होता है?
(अ) जड़ (ब) पत्ती
(स) भूमिगत तना (स्तंभ कंद) (द) बीज
उत्तर: (स) भूमिगत तना (स्तंभ कंद)
- निषेचन के फलस्वरूप बनने वाली संरचना कहलाती है?
(अ) युग्मनज (ब) युग्मक
(स) बीजाणु. (द) मुकुल
उत्तर: (अ) युग्मनज
- जीवों का वह जीवनकाल जो जन्म से मृत्यु तक चलता है, कहलाता है?
(अ) जनन काल
(ब) जीवन अवधि (जीवनकाल)
(स) किशोरावस्था
(द) प्रौढ़ावस्था
उत्तर: (ब) जीवन अवधि
- समयुग्मकी (isogamy) में संलयन होता है?
(अ) दो असमान युग्मकों का
(ब) दो समान युग्मकों का
(स) केवल शुक्राणु का
(द) केवल अंडाणु का
उत्तर: (ब) दो समान युग्मकों का
- निम्न में उभयलिंगी (Bisexual) जीव कौन-सा है?
(अ) मनुष्य
(ब) केंचुआ
(स) कॉकरोच
(द) मेढ़क
उत्तर: (ब) केंचुआ - पर्णकलिका (पत्ती) द्वारा कायिक प्रवर्धन किसमें होता है?
(अ) आलू
(ब) ब्रायोफिलम
(स) अदरक
(द) गन्ना
उत्तर: (ब) ब्रायोफिलम - अलैंगिक जनन से उत्पन्न संतति कहलाती है?
(अ) क्लोन (ब) संकर
(स) युग्मनज (द) बीजाणु
उत्तर: (अ) क्लोन
- जनन की वह विधि जिसमें युग्मकों का निर्माण नहीं होता, कहलाती है?
(अ) लैंगिक जनन
(ब) अलैंगिक जनन
(स) निषेचन
(द) परागण
उत्तर: (ब) अलैंगिक जनन
लघु उत्तरीय प्रश्न (8 प्रश्न):-
- जनन किसे कहते हैं?
उत्तर:- वह जैविक प्रक्रिया जिसके द्वारा जीव अपने समान नई संतति उत्पन्न करते हैं, जनन कहलाती है।
- क्लोन क्या है?
उत्तर:- अलैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न आनुवंशिक रूप से समान संततियों के समूह को क्लोन कहते हैं।
- द्विखंडन किसे कहते हैं?
उत्तर – जिस प्रक्रिया में एक कोशिका विभाजित होकर दो समान संतति कोशिकाएँ बनाती है, उसे द्विखंडन कहते हैं (जैसे अमीबा में)।
- एकलिंगी और उभयलिंगी जीव में अंतर बताइए।
उत्तर:- एकलिंगी जीवों में नर व मादा अलग-अलग होते हैं (जैसे मनुष्य), जबकि उभयलिंगी जीवों में एक ही जीव में नर व मादा दोनों जननांग होते हैं (जैसे केंचुआ)।
- कायिक प्रवर्धन किसे कहते हैं?
उत्तर:- पौधों के कायिक भागों (जड़, तना, पत्ती) द्वारा नए पौधों का निर्माण कायिक प्रवर्धन कहलाता है।
- रजोनिवृत्ति (Menopause) क्या है?
उत्तर:- स्त्रियों में रजोधर्म (मासिक चक्र) का स्थायी रूप से रुक जाना रजोनिवृत्ति कहलाती है, जो लगभग 50 वर्ष की आयु में होती है।
- युग्मक संलयन क्या है?
उत्तर:- नर व मादा युग्मकों के संयोजन की प्रक्रिया को युग्मक संलयन (सिनगैमी) कहते हैं, जिससे युग्मनज बनता है।
- किशोरावस्था (Puberty) किसे कहते हैं?
उत्तर:- वह अवस्था जिसमें जीव लैंगिक रूप से परिपक्व होकर जनन में सक्षम हो जाता है, किशोरावस्था कहलाती है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (10 प्रश्न)
- अलैंगिक जनन क्या है? इसकी विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:- अलैंगिक जनन में युग्मकों के निर्माण के बिना ही एकल जनक से नई संतति उत्पन्न होती है। विधियाँ: द्विखंडन (अमीबा), मुकुलन (हाइड्रा, यीस्ट), खंडन (स्पाइरोगायरा), बीजाणु निर्माण (कवक), पुनर्जनन (प्लेनेरिया), कायिक प्रवर्धन (आलू, अदरक)।
- लैंगिक जनन तथा अलैंगिक जनन में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:- लैंगिक जनन में दो जनकों की आवश्यकता होती है, युग्मक बनते हैं, निषेचन होता है और संतति में विविधता आती है। अलैंगिक जनन में एक ही जनक होता है, युग्मक नहीं बनते और संतति आनुवंशिक रूप से जनक के समान (क्लोन) होती है। - जीव के जीवनकाल की विभिन्न अवस्थाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:- जीवनकाल में भ्रूणीय वृद्धि, जन्म, किशोरावस्था, प्रौढ़ावस्था, जनन काल तथा जरावस्था (वृद्धावस्था) शामिल हैं, जो अंततः मृत्यु पर समाप्त होती है। यह अवधि प्रजाति के अनुसार भिन्न-भिन्न होती है।
- पुष्पीय पौधों में कायिक प्रवर्धन की विभिन्न विधियाँ उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:- जड़ द्वारा (शकरकंद), तना द्वारा (आलू-स्तंभ कंद, अदरक-प्रकंद, गन्ना-भूस्तारी), पत्ती द्वारा (ब्रायोफिलम) कायिक प्रवर्धन होता है। इन विधियों से नए पौधे जनक के समान गुण वाले उत्पन्न होते हैं।
- लैंगिक जनन में युग्मकों का महत्व समझाइए।
उत्तर:- युग्मक अगुणित (haploid) कोशिकाएँ हैं जो अर्धसूत्री विभाजन से बनती हैं। नर व मादा युग्मक संलयित होकर द्विगुणित युग्मनज बनाते हैं, जिससे आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होती है, जो जाति के विकास में सहायक है।
- समयुग्मकी और विषमयुग्मकी में अंतर उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर:- समयुग्मकी में दोनों संलयित युग्मक संरचना व आकार में समान होते हैं (जैसे शैवाल)। विषमयुग्मकी में नर व मादा युग्मक आकार में भिन्न होते हैं—नर युग्मक छोटा व गतिशील (शुक्राणु), मादा युग्मक बड़ा व अचल (अंडाणु) होता है (जैसे मनुष्य)।
- जनन की जैविक महत्ता पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:- जनन जीवों में जाति की निरंतरता बनाए रखता है। यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी आनुवंशिक सूचना का स्थानांतरण करता है और लैंगिक जनन द्वारा विविधता उत्पन्न कर जीवों को पर्यावरणीय परिवर्तनों के अनुकूल बनाता है, जिससे विकास (evolution) संभव होता है।
- एकलिंगाश्रयी तथा द्विलिंगाश्रयी पौधों को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:- जिन पौधों में नर व मादा पुष्प एक ही पौधे पर होते हैं, वे एकलिंगाश्रयी कहलाते हैं (जैसे मक्का, ककड़ी)। जिन पौधों में नर व मादा पुष्प अलग-अलग पौधों पर होते हैं, वे द्विलिंगाश्रयी कहलाते हैं (जैसे पपीता, शहतूत)।
- पुनर्जनन (Regeneration) किसे कहते हैं? उदाहरण सहित इसकी प्रक्रिया एवं महत्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर:- पुनर्जनन वह प्रक्रिया है जिसमें कोई जीव अपने कटे हुए या क्षतिग्रस्त भाग से एक नया, संपूर्ण जीव विकसित करने की क्षमता रखता है। यह एक विशेष प्रकार का अलैंगिक जनन है, जो मुख्य रूप से निम्न श्रेणी के जीवों में पाया जाता है। इसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण प्लेनेरिया (चपटा कृमि) है—यदि इसके शरीर को कई टुकड़ों में काट दिया जाए, तो प्रत्येक टुकड़ा पुनर्जनन द्वारा एक पूर्ण नए जीव में विकसित हो जाता है। इसी प्रकार हाइड्रा, स्पंज (जैसे साइकॉन) तथा कुछ शैवालों में भी पुनर्जनन की क्षमता देखी जाती है।
पुनर्जनन की प्रक्रिया विशेष कोशिकाओं (जिन्हें अविभेदित कोशिकाएँ या टोटीपोटेंट कोशिकाएँ कहते हैं) के तीव्र विभाजन से आरंभ होती है। ये कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त स्थान पर तेजी से विभाजित होकर एक कोशिका-समूह (ब्लास्टेमा) बनाती हैं, जो बाद में विभेदन की प्रक्रिया से गुजरकर शरीर के सभी आवश्यक ऊतकों व अंगों का निर्माण करती हैं। इस प्रकार खोया हुआ भाग पुनः प्राप्त हो जाता है।
पुनर्जनन का जैविक महत्व अत्यधिक है। यह जीवों को शिकारियों या दुर्घटनाओं से हुई क्षति की भरपाई करने में सहायता करता है, जिससे उनकी उत्तरजीविता (survival) बढ़ जाती है। साथ ही यह क्षमता जीवों की अनुकूलनशीलता को भी दर्शाती है। हालांकि सभी जीवों में पुनर्जनन की क्षमता समान नहीं होती—उच्च कशेरुकियों में यह क्षमता बहुत सीमित होती है, जबकि निम्न व सरल संरचना वाले जीवों में यह अधिक विकसित होती है। वैज्ञानिक दृष्टि से पुनर्जनन का अध्ययन ऊतक पुनर्निर्माण व चिकित्सा विज्ञान में भी उपयोगी सिद्ध हो रहा है।
- अनिषेकजनन (Parthenogenesis) तथा बहुभ्रूणता (Polyembryony) पर विस्तृत टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:- अनिषेकजनन (Parthenogenesis): यह एक विशेष प्रकार की जनन प्रक्रिया है जिसमें मादा युग्मक (अंडाणु) बिना निषेचन (fertilization) के ही नए जीव में विकसित हो जाता है, अर्थात नर युग्मक की आवश्यकता नहीं पड़ती। यह प्रक्रिया कुछ कीटों जैसे मधुमक्खी, चींटी तथा कुछ छिपकलियों व एफिड्स में पाई जाती है। मधुमक्खियों में अनिषेचित अंडों से नर मधुमक्खियाँ (ड्रोन) उत्पन्न होती हैं, जबकि निषेचित अंडों से मादा मधुमक्खियाँ बनती हैं। अनिषेकजनन प्राकृतिक रूप से जनसंख्या नियंत्रण तथा लिंग-निर्धारण की एक क्रियाविधि के रूप में कार्य करता है। इस प्रक्रिया से उत्पन्न संतति सामान्यतः आनुवंशिक रूप से मादा जनक के समान होती है, इसलिए इसे भी अलैंगिक जनन का एक रूप माना जाता है, यद्यपि इसमें युग्मक भाग लेता है।
बहुभ्रूणता (Polyembryony): यह वह घटना है जिसमें एक ही बीज या निषेचित अंडे से एक से अधिक भ्रूण उत्पन्न होते हैं। सामान्यतः एक निषेचित अंडाणु से केवल एक भ्रूण बनता है, परंतु बहुभ्रूणता में भ्रूणपोष ऊतक की अतिरिक्त कोशिकाएँ भी भ्रूण के समान विकसित होने लगती हैं, जिससे एक ही बीज के भीतर कई भ्रूण बन जाते हैं। यह घटना नारंगी (साइट्रस) तथा आम जैसे कुछ फलों वाले पौधों में सामान्यतः देखी जाती है। बहुभ्रूणता से प्राप्त अतिरिक्त भ्रूण प्रायः अलैंगिक उत्पत्ति (अपोमिक्सिस) के होते हैं और आनुवंशिक रूप से जनक पौधे के समान होते हैं। कृषि विज्ञान की दृष्टि से बहुभ्रूणता अत्यंत उपयोगी है, क्योंकि इसके द्वारा उन्नत किस्मों के पौधे बिना किसी आनुवंशिक परिवर्तन के बड़ी संख्या में तैयार किए जा सकते हैं, जिससे फलदार वृक्षों की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायता मिलती है।